RAMAYANA EPISODE 1(भगवान राम का जन्म)

Ramayana Episode 1 में भगवान राम का जन्म और बाल्यकाल दिखाया है।

महाकाव्य के अनुसार, राम का जन्म राजा दशरथ और रानी कौशल्या के घर अयोध्या शहर में हुआ था। वह चार पुत्रों में सबसे बड़े थे, अन्य पुत्र भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न थे।

राम का जन्म एक महत्वपूर्ण अवसर था, क्योंकि उन्हें हिंदू देवता विष्णु का सातवां अवतार माना जाता था। उनके आगमन की भविष्यवाणी कई ऋषियों और द्रष्टाओं ने की थी, जिन्होंने भविष्यवाणी की थी कि वह एक महान शासक और धर्म के समर्थक होंगे।

राम के जन्म के दिन आकाश में अनेक शुभ संकेत दिखाई दिये। सूर्य, चंद्रमा और तारे सभी एक सीध में थे, और महल से एक महान रोशनी चमक रही थी। अयोध्या के लोग बहुत खुश हुए और उन्होंने राम के जन्म को बड़े उत्सव के साथ मनाया।

भगवान राम का जन्म क्यों और कैसे हुआ था?

ब्रह्मा और महादेव के वरदान से राक्षसराज रावण को असीम शक्तियाँ प्राप्त होती हैं। रावण इन शक्तियों का उपयोग पृथ्वी और देव लोक के विनाश के लिये करने लगता है। उसके पापकर्मो से पृथ्वी पर धर्म और सत्य की हानि होने लगती है। पृथ्वी पर असुरों की शक्तियाँ बढ़ने लगती हैं और साधु-सन्तों की शक्तियाँ उनका प्रतिकार नहीं कर पाती है। रावण से भयभीत सभी देवी देवता जानते हैं कि जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ने लगता है तो धर्म की पुनर्स्थापना के लिये भगवान को मानव रूप में अवतार लेना होता है। इसी आशा के साथ वे सभी भगवान विष्णु के पास गुहार लगाने जाते हैं।

पृथ्वी पर अयोध्या के राजा दशरथ अपनी कोई सन्तान न होने के कारण चिन्तित हैं। उन्हें अपने राज्य के लिए उत्तराधिकारी चाहिये। समस्या निवारण के लिये राजा अपनी रानियों के साथ महर्षि वशिष्ठ के पास जाते हैं। वशिष्ठ उन्हें पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्र कामेष्ठि यज्ञ का उपाय सुझाते हैं। रानी कौशल्या महर्षि वशिष्ठ से यज्ञ करने का निवेदन करती हैं किन्तु वशिष्ठ उन्हें बताते हैं कि इस यज्ञ को अथर्व वेद के ज्ञाता श्रृंग मुनि ही सम्पन्न करा सकते हैं। छोटी रानी कैकेयी श्रृंग मुनि को आमंत्रित करने की बात कहती हैं, किन्तु महर्षि वशिष्ठ उन्हें टोकते हैं कि दशरथ को राजा बनकर नहीं, एक याची के रूप में स्वयं उनके पास जाना होगा। राजा दशरथ नंगे पांव शृंग मुनि के आश्रम जाते हैं और अपने आँसुओं से उनकी चरण वन्दना करते हैं। शृंग मुनि अत्यन्त प्रसन्न होते हैं और उनका मनोरथ पूर्ण करने के लिये यज्ञ का आयोजन करते हैं।

दशरथ ने कई महान ऋषियों, तपस्वियों और विद्वानों को यज्ञ का आमंत्रण भेजा। फिर गुरु वशिष्ठ और शृंग ऋषि के नेतृत्व में यज्ञ शुरू हुआ। वैदिक मंत्रोच्चारण से ये महान यज्ञ संपन्न हुआ। यज्ञकुण्ड से अग्निदेव प्रकट होते हैं और राजा दशरथ को खीर के एक पात्र के साथ इच्छापूर्ति का वरदान देते हैं। दशरथ वह खीर कौशल्या व कैकेयी को खाने के लिये दे देते हैं। दोनो रानियां स्नेहवश अपनी खीर का आधा-आधा अंश छोटी रानी सुमित्रा को दे देती हैं। समय बीतने के साथ चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र में तीनों रानियों को पुत्र प्राप्ति होती है। बड़ी रानी कौशल्या और मंझली रानी कैकेयी को एक-एक पुत्र और खीर के दो अंश मिलने के कारण छोटी रानी सुमित्रा को जुड़वां पुत्र होते हैं। इसके साथ ही देवी-देवताओ और पृथ्वीवासियों की प्रतीक्षा की घड़ी समाप्त होती है।

भगवान राम का जन्म कब हुआ था ?

राम का जन्म  त्रेता युग में हुआ था।  वर्तमान युग में कलियुग, हाल ही में शुरू हुआ है (लगभग 5,500 वर्ष बीत गए है), त्रेता युग के अंत में राम के जन्म का तात्पर्य है कि पृथ्वी पर उनका वर्तमान अवतार पारंपरिक रूप से लगभग 11,000 साल पहले हुआ माना जाता है।

यूनीक एग्जीबिशन ऑन कल्चरल कॉन्टिन्यूटी फ्रॉम ऋग्वेद टू रोबॉटिक्स नाम की इस एग्जीबिशन में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार भगवान राम का जन्म  5114 ईसापूर्व पर हुआ था।

 सतयुग = 1728000 वर्ष
त्रेतायुग = 1296000 वर्ष
द्वापरयुग = 864000 वर्ष
कलियुग = 432000 वर्ष
4 युग = 1 चतुर्युगी/महायुग
चतुर्युगी = 4320000 वर्ष
1 मन्वन्तर = 71 चतुर्युगी
1 कल्प = 1000 चतुर्युगी
1 कल्प = 14 मन्वन्तर
1 देववर्ष = 12000 मानववर्ष

रामायण का सबसे पुराना ज्ञात संस्करण 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व का है। यह ऋषि वाल्मीकि द्वारा लिखा गया था, जिन्हें संस्कृत साहित्य के महानतम कवियों में से एक माना जाता है।

गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य श्री निश्चलानंद सरस्वती प्रभ्रुति, जो संतों द्वारा पूजनीय हैं, के अनुसार भगवान राम का अवतार श्वेतवाराह कल्प के सातवें वैवस्वत मन्वंतर के चौबीसवें त्रेता युग में हुआ था। यह श्री रामचन्द्र जी का समय लगभग सवा दो करोड़ वर्ष पूर्व का है।

भगवान राम का जन्म कहाँ हुआ था ?

राम का जन्म स्थान अयोध्या है, जो वर्तमान भारत के उत्तर प्रदेश में सरयू नदी के तट पर स्थित एक शहर है। अयोध्या  भगवान राम के पूर्वजों की ही राजधानी थी।

राम का जन्म

भगवान राम का नामकरण

महर्षि वशिष्ठ द्वारा अयोध्या के चारो राजकुमारों का नामकरण किया गया था। महर्षि वशिष्ठ कहते हैं कि धर्म और सत्य की रक्षा करने के लिए और अखिल विश्व को आनंद देने आये ज्येष्ठ पुत्र का दो अक्षर का नाम “राम“ होगा ।

रानी कैकेयी के पुत्र का नाम “भरत“ और रानी सुमित्रा के जुड़वाँ पुत्रों के नाम “लक्ष्मण और शत्रुघ्न“ होंगे।

महर्षि वशिष्ठ चारों भ्राताओं में परस्पर अटूट प्रेम रहने की भविष्यवाणी भी करते हैं।

 

रामायण एक भारतीय टेलीविजन श्रृंखला है जो इसी नाम के प्राचीन भारतीय संस्कृत महाकाव्य पर आधारित है। यह श्रृंखला मूल रूप से 1987 और 1988 के बीच दूरदर्शन पर प्रसारित हुई थी। इस श्रृंखला के निर्माण, लेखन और निर्देशन का श्रेय श्री रामानंद सागर को जाता है। यह श्रृंखला मुख्य रूप से वाल्मीकि रचित ‘रामायण’ और तुलसीदास रचित ‘रामचरितमानस’ पर आधारित है। इस धारावाहिक को रिकॉर्ड 82 प्रतिशत दर्शकों ने देखा था, जो किसी भी भारतीय टेलीविजन श्रृंखला के लिए एक कीर्तिमान है।

 

 

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FAQs

1 राम का जन्म कितने वर्ष पहले हुआ था ?

यूनीक एग्जीबिशन ऑन कल्चरल कॉन्टिन्यूटी फ्रॉम ऋग्वेद टू रोबॉटिक्स नाम की इस एग्जीबिशन में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार भगवान राम का जन्म  5114 ईसापूर्व पर हुआ था।

2 राम का जन्म कौन से युग में हुआ था ?

राम का जन्म  त्रेता युग में हुआ था।  वर्तमान युग में कलियुग, हाल ही में शुरू हुआ है (लगभग 5,500 वर्ष बीत गए है), त्रेता युग के अंत में राम के जन्म का तात्पर्य है कि पृथ्वी पर उनका वर्तमान अवतार पारंपरिक रूप से लगभग 11,000 साल पहले हुआ माना जाता है।

3 भगवान् राम की आयु कितने बर्ष की थी ?

माना जाता कि श्रीराम ने 11000 वर्षों तक अयोध्या पर राज्य किया। तो उनकी आयु 11100 वर्ष अर्थात लगभग 30 दिव्य वर्ष के आस पास मान सकते हैं

 

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